क्या कहा ??
क्या कहा सुबह हो गई है ??
अरे अभी तो पूरी रात बाकी है !!
अधूरी थी जो सदियों से वो मुलाकात बाकी है !!
जो जुबाँ पर आ के भी अनकही रह गई,तेरी मेरी वो अनकही बात बाकी है !!
क्या कहा जा रहे तो अपने आशियाँ की ओर ??
अरे आशियाँ तो हमने भी बनाये थे सपनों के !!
जिनमें बसे थे अपने कुछ अपनों के !!
अब न सपने रहे न अपने रहे !!
हम तड़प रहें उसी आशियाँ में बिन अपनों के !!
क्या कहा इश्क़ करते हो हमसे ??
अरे जाओ साहब हम छोटे लोग हैं !!
अपने ही गमों में रोते लोग हैं !!
हम वो नहीं,जिनसे आप मोहब्बत कर लें !!
वो तो किस्मत के धनी होते लोग हैं !!
क्या कहा आपने मजाक किया था ??
अरे साहब हम गरीबों का इश्क मजा ही तो है !!
हमारा इश्क़ हमारी सबसे बड़ी सजा ही तो है !!
जानते हैं हमें रुलाने में रजामंदी है आपकी !!
पर आपकी रजा,हमारे लिए खुदा की रजा ही तो है !!
क्या कहा अब दिल भर गया है हमसे ??
अब क्या कहें हम आपसे आप हमारी मोहब्बत का फूल हैं !!
दिल की बात मान कर हमने जो की थी आप वही भूल हैं !!
दिल दिया था आपको और जान भी दे दी !!
इसे सम्भाल के रखिये या मिटा दीजिये !!
जो मर्जी आपकी,आपकी हर मर्जी हमें दिल से कुबूल है !!
#Navdeep_writes
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अल्फ़ाज कम पड़ रहे है तेरी मासूम मोहब्बत देख कर|
अल्फ़ाज कम पड़ रहे है तेरी मासूम मोहब्बत देख कर|