ये अजीब दिल..😢😢

"ये दिल भी कितना अजीब होता है"
कभी खुश होता है गैरों के मिलने से,
कभी अपनों के दूर जाने पर रोता है !!
कभी बुलाता है तुझे ही सपनों में,
बस तुझे सपनों में देखने को सोता है !!
ये दिल भी कितना अजीब होता है !!

कभी अकेले में भी सजाता है महफिलें ये दिल !!
कभी भरी महफ़िल में भी तन्हा होता है !!
कभी करता है याद तुमको ये दिल,
कभी चुपचाप अकेले में रोता है !!
ये दिल भी कितना अजीब होता है !!

कभी इश्क़ के समंदर में लगाता है गोते,
कभी तन्हाई के गहरे सागर में खोता है !!
कभी दिल सोचता है,भुला दे तुझको !!
कभी दूर जाने के डर से बैचेन होता है !!
ये दिल भी कितना अजीब होता है !!

कभी आती है याद जो तेरी,रो लेता है अकेले में !!
महफिलों में अक्सर ये दिल,खामोश होता है !!
कभी सोचता हूँ, मैं इस शहर में अमीर हूँ सबसे !!
कभी तेरे बिन ये दिल सबसे बड़ा फकीर होता है !!
ये दिल भी कितना अजीब होता है !!
हाँ दिल भी कितना अजीब होता है !!

Navdeep_writes

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