आज फिर नींद हमसे खफा हो गई

करता रहा याद सारी रात उसको,थकान आँखों की हवा हो गई !!
आज फिर नींद हमसे खफा हो गई,आज फिर नींद हमसे खफा हो गई !!

वो तो न आई,पर रात भर उसकी यादें सताती रही !!
उसके न आने से दिल मैं, बेचैनी बेपनाह हो गई !!
आज फिर नींद हमसे खफा हो गई,आज फिर नींद हमसे खफा हो गई !!

वो इश्क़ है, जुनूँ भी है, मोहब्बत,चाहत सब कुछ है वो !!
मैं शायद उसका कुछ भी नहीं, पर वो मेरी अब जाँ हो गई !!
आज फिर नींद हमसे खफा हो गई,आज फिर नींद हमसे खफा हो गई !!

उनींदी आंखों में उसके सपने बहुत हैं, पर शायद उसके मुझसे भी खास अपने बहुत हैं !!
मरते हुए भी रहा लबों पर नाम उसका ही,शायद मोहब्बत की इन्तेहाँ हो गई !!
आज फिर नींद हमसे खफा हो गई,आज फिर नींद हमसे खफा हो गई !!

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