तेरा खयाल

आज-कल बैठे बिठाये कहीं खो जाता हूँ मैं !!
न हँसता हूँ और ना ही रो पाता हूँ मैं !!
एक पल तो रहता हूँ मैं ख़ामोश सा !!
अगले ही पल तेरे नाम को बुलाता हूँ मैं !!

कुछ बदला है मुझमें पर खबर नहीं मुझको !!
तू जान है मेरी ये खबर नहीं तुझको !!
तेरे खयालों से वक़्त बेवक्त मुस्कुराता हूँ मैं !!
आज-कल बैठे बिठाये कहीं खो जाता हूँ मैं !!

हाँ अब मैं भी बदलने लगा हूँ !!
किसी की अनजान चाहत में जलने लगा हूँ !!
इन तन्हाइयों,इन वीरानियों में भी,तेरी आवाज को सुन पाता हूँ मैं !!
आज-कल बैठे बिठाये कहीं खो जाता हूँ मैं !!

सोचता हूँ कहीं तू मेरी मोहब्बत तो नहीं  !!
जो सपनों में थी वही मूरत तो नहीं !!
तेरे खयालों में अब रात-दिन बिताता हूँ मैं !!
आज-कल बैठे बिठाये कहीं खो जाता हूँ मैं !!

Navdeep_writes

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