कैसे तुमको समझाऊँ मैं....😢😢

तुम गलत समझ रही हो मुझको,
कैसे तुमको समझाऊँ मैं !!
काश मैं हनुमत बन जाऊँ,
ये सीना चीर दिखाऊँ तुम्हें !!
तुम हो जहाँ आवाज दो मुझको,
तुम तक दौड़ा चला आऊँ मैं !!
तुम गलत समझ रही हो मुझको,
कैसे तुमको समजाऊँ मैं !!

मैं भी एक इंसान हूँ साथी,
दुनिया से अंजान हूँ साथी !!
हाँ आज-कल तर बेरुखी से,
बहुत अधिक परेशान हूँ साथी !!
मैं इश्क़ मोहब्बत न माँगूँ,
बस चाहूँ तेरा साथ ए साथी !!
तेरा साथ जो मिल जाये,
मीलों तक चलता जाऊँ मैं !!
तुम गलत समझ रही हो मुझको,
कैसे तुमको समझाऊँ मैं !!

हाँ अलग हूँ मैं इन लोगों से,
और अलग सोच में रखता हूँ !!
वो बात मोहब्बत की करते,
मैं दोस्ती के शौक रखता हूँ !!
न कुछ माँगूँ दुनिया से फिर,
तुम जैसा दोस्त जो पाऊँ मैं !!
तुम गलत समझ रही हो मुझको,
कैसे तुमको समझाऊँ मैं !!

हाँ भूल हुई होगी मुझसे,
कुछ गलत कहा होगा तुझसे !!
तू यार मेरा,तू हमदम है,
तुझ बिन अब कहाँ जाऊँ मैं !!
कर माफ मुझे दे ए साथी,
वरना घुट-घुट मर जाऊँ मैं !!
तुम गलत समझ रही हो मुझको,
कैसे तुमको समझाऊँ मैं !!

नहीं जरूरत मुझको सोने चाँदी की,
बस चाहत मुझको मेरे साकी की !!
न ही चाहिए,मुझको कोई इश्क़ तेरा !!
हाथ जोड़ कर माँगूँ माफी,बस सुन ले इतना कहना मेरा !!
तू मोहब्बत से बढ़कर दोस्त है मेरी,तेरी दोस्ती को छोड़ कहाँ जाऊँ मैं !!
तुम गलत समझ रही हो मुझको,कैसे तुमको समझाऊँ मैं !!
कैसे तुमको समझाऊँ मैं !!😢😢😢
Navdeep_Writes

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