काश मोहब्बत न होती
काश इस जहाँ में मोहब्बत न होती !😢😢
मुझे यूँ छुप छुप के रोने की जरूरत न होती !!
जो इस इस दिल में तेरी चाहत न होती !!
भले मर जाता ये दिल तन्हाइयों में !!
मरने के लिए किसी जहर की जरूरत न होती !!
काश इस जहाँ में मोहब्बत न होती !!
न लगते दिल में गमों के मेले,
दिलों के बाजार में भी यूँ रौनक न होती !!
न होता फिर कोई मेरी तरह बर्बाद यहाँ,
फिर किसी आशिक की मैय्यत न होती !!
न होता कोई राँझा बर्बाद यहाँ,
कोई हीर भी दिन- रात न रोती !!
काश इस जहाँ में मोहब्बत न होती !!
न आती याद किसी को मोहब्बत अपनी !!
शराब के सहारे की भी जरूरत न होती !!
न मुड़ते मेरे कदम तेरी गली में कभी,
तेरे द्वार पर भी कोई दस्तक न होती !!
न होता यूँ बर्बाद हर आशिक़,
कोई माँ अपने बेटे न खोती !!
काश इस जहाँ में मोहब्बत न होती !!
काश इस जहाँ में मोहब्बत न होती !!
Navdeep_writes
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